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भगवान शिव को क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए शंख से जल?

भगवान शिव को शीतल जल चढ़ाने से वे अतिप्रसन्न होते हैं। उन्हें जल अर्पित करने के नियम भी बहुत आसान हैं। इसीलिए जीवमात्र भगवान भोलेनाथ की आराधना कर सकता है। क्या आप जानते हैं, शिवजी को एक खास वस्तु से कभी जल नहीं चढ़ाना चाहिए?

नई दिल्ली। शास्त्रों में इसका निषेध किया गया है। वह वस्तु है – शंख। शिवजी को शंख से जल चढ़ाना वर्जित माना गया है। शिवपुराण में इस घटना का उल्लेख किया गया है जिसके कारण शिव पर शंख से जल चढ़ाने का निषेध है। 

शिवपुराण की कथा के अनुसार एक बार शंखचूड़ नामक महाशक्तिशाली दैत्य उत्पन्न हुआ। वह दैत्यराज दंभ का पुत्र था। उसके जन्म से पूर्व दंभ के कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसे पुत्र प्राप्ति की इच्छा थी। इसके लिए उसने विष्णुजी की आराधना की। विष्णुजी प्रकट हुए और उन्होंने वरदान मांगने के लिए कहा। 

दंभ ने अत्यंत पराक्रमी पुत्र का वरदान मांगा। विष्णुजी ने वरदान दे दिया। तब दंभ के घर शंखचूड़ पुत्र रूप में पैदा हुआ। शंखचूड़ ने ब्रह्माजी की तपस्या की और उनसे वरदान पाकर वह देवताओं के लिए अजेय हो गया। इसके बाद उसका विवाह तुलसी से हो गया। 

शक्तिशाली होकर शंखचूड़ ने भयंकर विनाश किया। उसके अत्याचारों से त्रस्त देवता विष्णुजी के पास सहायता मांगने गए परंतु विष्णुजी शंखचूड़ का वध नहीं कर सकते थे, क्योंकि वह उन्हीं के वरदान से उत्पन्न हुआ था। इसके पश्चात देवता शिवजी के पास गए। तब शिवजी ने अपने त्रिशूल से शंखचूड़ को भस्म कर दिया।

उसी भस्म से शंख का निर्माण हुआ। इससे सभी देवताओं को जल चढ़ाया जा सकता है परंतु शिव को नहीं चढ़ाया जा सकता। चूंकि शिव ने उसका वध किया था, अत: उन्हें शंख से जल अर्पित करने का निषेध किया गया है। शिवजी को जल चढ़ाते समय इस नियम का ध्यान रखना चाहिए।

 
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