उत्तराखंड

मंत्री ने जूस पिलाकर तुड़वाया प्रधानों का अनशन, फिलहाल नहीं बढ़ पाएगा मानदेय

देहरादून। प्रदेश सरकार के खिलाफ चल रहा ग्राम प्रधानों को आंदोलन नौ दिन बाद आज शुक्रवार को समाप्त हो गया। चार सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 10 दिनों से परेड ग्राउंड पर यह अनशन चल रहा था। पंचायती राज मंत्री अरविंद पांडेय ने अनशन स्थल पहुंचकर अनशनकारियों को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।

पंचायती राज मंत्री अरविंद पाण्डेय से मिले आश्वासन के बाद ग्राम प्रधानों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। उन्होने प्रधान संगठन की 4 सूत्रीय मांगों को 2 महीने के अंदर मानने की बात कही है। प्रधानों ने पंचायती राज मंत्री का आभार व्यक्त किया कि वह उनकी सभी मांग मानने को तैयार हो गए हैं।

बता दें कि ग्राम प्रधान अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से परेड ग्राउंड में धरना दे रहे थे। जब मांगों को लेकर सरकार की तरफ से कोई उम्मीद नज़र नहीं आयी तो कुछ ग्राम प्रधान भूख हड़ताल पर बैठ गए। भूख हड़ताल पर बैठे ग्राम प्रधानों पर राजनीतिक लोागों ने अपनी—अपनी रोटियां सेंकने की कोशिश की और इस मुद्दे पर खूब राजनीति भी हुई। सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह अनशनस्थल पहुंचे और फिर पूर्व सीएम मुख्यमंत्री हरीश रावत भी यहां पहुंचे और अनशनकारियों को अपना समर्थन दिया।

विपक्ष के बढ़ते दबाव और प्रधानों के प्रदर्शन के आगे झुकते हुए आखिरकार सरकार ने प्रधानों को बातचीत के लिए बुला ही लिया। जिसके बाद प्रधानों का एक प्रतिनिधिमंडल आज पंचायती राज मंत्री अरविंद पांडेय के आवास पर उनसे मिला। इस मुलाकात में मंत्री ने प्रधानों की ज्यादातर मांगों को मान लिया।

पंचायती राज मंत्री ने प्रधानों को आश्वासन दिया कि राज्य वित्त दिए जाने की मांग और पंचायती राज एक्ट में संशोधन कर उन्हे आगामी कैबिनेट में पास करवाया जायेगा। इसके अलावा गांवों को नगर निगम में शामिल नहीं किये जाने की मांग पर भी निकाय मंत्री से बातचीत कर हल निकाला जायेगा।

वहीं, मंत्री ने प्रधानों का मानदेय बढ़ाये जाने की मांग पर साफ किया कि फिलहाल प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है इसलिये प्रधानों को पूर्व में बढ़ाये गए मानदेय पर ही फिलहाल संतोष करना होगा। पंचायती राज मंत्री ने प्रधानों को उनकी मांगों के निराकरण के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया है।

मंत्री के आश्वासन के बाद ग्राम प्रधान आश्वस्त तो दिखे लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर 31 दिसंबर तक उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वो फिर से आंदोलन शुरू कर देंगे।

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