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आखिर क्यों 14 साल बाद BSF के हवाले की गई कश्मीर? भेजे गए 10 हजार से ज्याद जवान

पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति व्याप्त हो गयी हैं। इसके साथ ही सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 35 ए पर सुनवाई होने वाली हैं। जिसकी वजह से जम्म्मू कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने घाटी में बंद का आह्वान किया हैं। घाटी में तनाव और बंद को देखते हुए यहां BSF के जवानों को भेजा जा रहा है।
इसी तनाव को देखते हुए पूरे श्रीनगर में धारा 144 लागू कर दी गई है और कई इलाकों में तो इंटरनेट सेवा भी बंद करवा दी गई है। 35-ए के तहत जम्मू कश्मीर के निवासियों को विशेष अधिकार मिले हुए हैं।
अलगाववादी नेता नहीं चाहते कि यह धारा हटाई जाए इसलिए उन्होंने रविवार को घाटी में बंद का आह्वान किया है। बंद से पहले प्रदेश के प्रशासन ने घाटी में ईंधन और जरूरत के सामान की आपूर्ति का आदेश दे दिया है। शनिवार को पूरे घाटी में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिली। घबराए लोगों ने वाहनों में ईंधन और जरूरी सामान का भंडारण करना शुरू कर दिया है।
आपको बता दें,श्रीनगर में पूरे 14 साल बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को तैनात किया गया  है। इससे पहले 2016 में फैली अशांति के वक्त अस्थायी तौर पर BSF को एक हफ्ते के लिए कश्मीर में तैनात किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा तैनात की गई अर्द्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों में 45 कंपनियां CRPF से है, जबकि BSF से 35 और SSB तथा ITBP से 10-10 कंपनियां हैं। प्रशासन द्वारा उठाए इस कदम का मकसद घाटी में कानून व्यवस्था और शांति बनाएं रखना हैं।
रिपोर्ट-मानसी शुक्ला
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