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‘नेपाल सीमा से सटे चम्पावत व पिथौरागढ़ ज़िलों में योजनाएं टाइम फ्रेम में हो पूरी’

उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए से इन परियोजनाओं समीक्षा की

पड़ोसी देश नेपाल की सीमा चम्पावत व पिथौरागढ़ जनपद की योजनाएं टाइम फ्रेम के अंदर पूरी की जाए। उच्च प्राथमिकता की योजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी।

उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए से इन परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे।मुख्य सचिव ने वन विभाग को कल तक आरवीएम निकासी की अनुमति देने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में इस बात की चर्चा की गई कि टनकपुर बैराज से नेपाल को शारदा नदी के किनारे भारतीय क्षेत्र में बनने वाली 1.3 किमी. सड़क के लिए लोनिवि पीआईयू टनकपुर ने 30 हज़ार क्यूबिक मीटर (मिट्टी व आरबीएम) सामग्री की ज़रूरत है। ऑल वेदर सड़क के चौड़ीकरण के दौरान निकलने वाली लगभग 20 हज़ार क्यूबिक मीटर सामग्री की अनुमति प्रदान कर दी गई है। बाकी बची 11 हज़ार क्यूबिक मीटर सामग्री बाटनागाड़ (टनकपुर) से उठाने के लिए शासन को अनुमति के लिए आवेदन किया गया है।

 

मुख्य सचिव ने टनकपुर से ब्रह्मदेव (नेपाल) को जोड़ने वाली 1.3 किमी. सड़क मार्ग के निर्माण और टनकपुर बैराज से नेपाल की ओर 1.2 किमी. भारत से नेपाल की ओर बन रहे सड़क व नहरों के कार्य में तेज़ी लाने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि लगभग 807 लाख रूपये की लागत से निर्मित होने वाली उक्त परियोजना निर्माण हेतु वन भूमि की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यदायी संस्था पीआईयू ठूलीगाड़ द्वारा कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है। परियोजना को अक्टूबर 2018 तक पूर्ण किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और परियोजना में वित्त पोषण एनएचपीसी बनबसा द्वारा किया जा रहा है।

टनकपुर से जौलजीबी की ओर निर्माणाधीन मार्ग के खलढ़ुंगा से सिरसा (नेपाल) के संयोजन के लिए काली नदी पर 400 मीटर विस्तार मोटर सेतु के लिए लोनिवि ने 1,145.40 लाख रूपए का बजट शासन को प्रेषित किया है। इस सेतु के स्थल चयन हेतु लोनिवि अभियंताओं द्वारा 29 मई को नेपाल के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण के उपरान्त सेतु निर्माण के लिए स्थान नियत कर दिया गया है।

टनकपुर बैराज से नेपाल को 75 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली 1.2 किमी. नहर निर्माण के  लिए एनएचपीसी ने मैकनिकल माइन्स से कार्य करने के लिए आवेदन किया है।

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