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बर्थडे स्पेशल : शब्दों के बेताज बादशाह है प्रसून जोशी

कहते हैं कि पर्दे के पीछे जो लोग काम करते हैं, उन्हें असली पहचान नहीं मिल पाती लेकिन प्रसून जोशी के साथ ऐसा नहीं है। प्रसून भले ही पर्दे के पीछे हो लेकिन उनकी शब्दों की दमदार जादूगरी किसी से छुपी नहीं है। अपने गानों से लेकर स्क्रिप्ट लेखन के क्षेत्र में प्रसून जोशी ने बहुत नाम कमाया। आज उनका जन्मदिन है। इस शख्स ने अपने जीवन में कविता के क्षेत्र हो या फिर फिल्मी गानों की बात हो प्रसून जोशी का जवाब नहीं है। फिल्म अगर हिट होती है तो केवल प्रसून जोशी के गाने से। प्रसून जोशी एक ऐसे व्यक्ति हैं जो हर विषयों पर अपनी प्रतिक्रियां शब्दों की जादूगरी से देते आये हैं। इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब उन्होंने रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या के बाद अपनी पुरानी कविता को लोगों के बीच शेयर की तो लोगों की आंखे नम हो गई। प्रस्तुत है वही कविता :
जब बचपन तुम्हारी गोद में आने से कतराने लगे,
जब मां की कोख से झांकती जिन्दगी,
बाहर आने से घबराने लगे,
समझो कुछ गलत है।
जब तलवारें फूलों पर जोर आजमाने लगें,
जब मासूम आंखों में खौफ नजर आने लगे,
समझो कुछ गलत है
जब ओस की बूंदों को हथेलियों पे नहीं,
हथियारों की नोंक पर थमना हो,
जब नन्हें-नन्हें तलुवों को आग से गुजरना हो,
समझो कुछ गलत है
जब किलकारियां सहम जायें
जब तोतली बोलियां खामोश हो जाएँ
समझो कुछ गलत है
कुछ नहीं बहुत कुछ गलत है
क्योंकि गोर से बारिश होनी चाहिये थी
पूरी दुनिया में
हर जगह टपकने चाहिये थे आंसू
रोना चाहिये था ऊपरवाले को
आसमान से
फूट-फूट कर
शर्म से झुकनी चाहिये थीं इंसानी सभ्यता की गर्दनें
शोक नहीं सोच का वक्त है
मातम नहीं सवालों का वक्त है ।
अगर इसके बाद भी सर उठा कर खड़ा हो सकता है इंसान
तो समझो कुछ गलत है।
यह भी रोचक बात है कि वह फिल्मों के आलावा विज्ञापन की दुनिया में भी प्रसून जोशी की तूती बोलती है। गीतकार भी ऐसे प्रसून जोशी जो हर मौकों पर अपने गानों से

लोगों का दिल जीत लेते हैं। चाहे वह खुशी हो या फिर गम, प्रसून जोशी का जवाब नहीं। आज उनका 45वां जन्मदिन है। प्रसून जोशी बॉलीवुड के हर किसी के चहेते बने हुए है। एक्टर से लेकर डायरेक्टर सब उनको खूब पंसद करते हैं। दो नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित प्रसून जोशी की कलम हमेशा कुछ नया करने के लिए जानी जाती है। उनके कुछ मशहूर गाने इस प्रकार है : दिल्ली 6 का गाना अर्जियां सारी मैं चेहरे पर लिख के लाया हूं..
ब्लैक का हां मैंने छूकर देखा है.. हां मैंने छूकर देखा है हर किसी के दिलों को छू लेती है
रंग दे बसंती का बेहद इमोशनल गाना लुका छिपी बहुत हुई.. सामने आ जा ना.. कहां कहां ढूंढ़ा तुझे, थक गई है अब तेरी मां.. आदि।
विज्ञापन जगत में भी उनकों हाथों-हाथ लिया जाता है। विज्ञापन की टैग लाइन हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। उनकी लिखी फिल्में और डायलॉग भी खूब सुर्खियां बटोरते हंै।

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