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नहीं रहे वैज्ञानिक, एकेडमिशियन, पद्म विभूषण प्रोफेसर यशपाल

नई दिल्ली। वैज्ञानिक और एकेडमिशियन पद्म विभूषण प्रोफेसर यशपाल का मंगलवार को निधन हो गया। वह नोएडा में रह रहे थे। देश के बड़े वैज्ञानिकों में इनकी गिनती की जाती है।

प्रोफेसर यशपाल का निधन, स्पेस एप्लीकेशन सेंटर' का पहला डॉयरेक्टर, कौसमिक किरणें, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटर रिसर्चयशपाल का जन्म 26 जनवरी 1926 में हुआ था। प्रोफेसर यशपाल ने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से फिजिक्स में पीएचडी हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटर रिसर्च से की। साल 1973 में भारत सरकार ने उन्हें ‘स्पेस एप्लीकेशन सेंटर’ का पहला डॉयरेक्टर नियुक्त किया था।

कौसमिक किरणों पर रिसर्च के लिए भी यशपाल को जाना जाता है। वह विज्ञान से जुड़े कार्यक्रम को लेकर आया करते थे। विज्ञान को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाने पर यूनेस्को ने उन्हें कलिंग सम्मान भी दिया था।

साल 1976 में पद्मभूषण सम्मान मिला था। इसके बाद साल 2013 में उन्हें पद्मविभूषण मिला. साल 1983-84 में वह योजना आयोग के मुख्य सलाहकार थे। वहीं, 1986 से 1991 तक यूजीसी के चेयरमैन रहे। साल 2007 से 2012 तक वह जेएनयू के चांसलर भी रहे।

आपको बता दें कि एनसीईआरटी की ओर से नेशनल करीकुलम फ्रेमवर्क बनाने के दौरान वो उसके चेयरमैन थे।

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