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इस फल की खेती से हो रहा किसानों को फायदा, बन रहे हैं लखपति

बाराबंकी: उत्तर प्रदेश में गैर पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने में जुटी योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा अनुदान मिलने के बाद बाराबंकी जिले में किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. बागबानी मिशन के तहत अनुदान मिलने के बाद जिले में इस फल की खेती शुरू करने वाले किसान लाखों रुपये का मुनाफा एक सीजन में कमा रहे हैं. बंपर मुनाफे के साथ यह फ्रूट स्वास्थ्य के नजरिए से भी काफी लाभकारी है. इसे पोषण का पावर हाउस भी कहा जाता है. एक्सपर्टस के मुताबिक, इसका सेवन करने से लोगों के शरीर पर बुढ़ापे का असर कम हो जाता है, क्योंकि ये डाइबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और ह्रदय के रोगियों के लिए रामबाण दवा की तरफ काम करता है. इसके साथ इसका सेवन करने से प्लेटलेट्स भी बढ़ती हैं. भारत सरकार ने इसको कमलम फ्रूट नाम दिया है.

यूपी की राजधानी लखनऊ से सटे जिले बाराबंकी में जो किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं, उनमें किसान गया प्रसाद मौर्य इसके जनक कहे जाते हैं. बाराबंकी मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर देवा शरीफ के पास मोहम्मदपुर बिशुनपुर गांव में प्रगतिशील किसान गया प्रसाद मौर्य ने तीन बीघे खेत में ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की थी, जो अब डेढ़ एकड़ तक फैल चुकी है. उन्हें प्रदेश सरकार की तरफ से बागबानी मिशन के तहत 30 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान भी मिला, जिसके बाद उनकी हिम्मत और ज्यादा मजबूत हुई. हालांकि 2011 में उन्हें कैंसर भी हुआ और दवाई में अच्छा खासा कर्ज भी हो गया, लेकिन इस बीमारी से बाहर निकलकर उन्होंने अपने ही गांव, अपनी मिट्टी में अवसर ढूंढे और आज धीरे धीरे उनके जीवन की रेल खुद की बनाई पटरी पर सरपट दौड़ रही है.

दरअसल ड्रैगन फ्रूट एक विदेशी फल है, ऐसे में बाराबंकी जिले में इसकी खेती काफी मुश्किल थी, लेकिन गया प्रसाद मौर्य के हौसले से उनकी और उनके परिवार की मेहनत रंग लाई. इसी का नतीजा है कि आज वह ड्रैगन फ्रूट की खेती करके बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. साथ ही अन्‍य लोगों को इसकी खेती के टिप्स दे रहे हैं. खेती के साथ गया प्रसाद अब ड्रैगन फ्रूट के प्लांट भी लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं. उनकी खेती देखकर आज जिले के कई और किसान भी ड्रैगन फ्रूट की खेती करने लगे हैं और लाखों रुपये लाभ कमा रहे हैं. सबसे बड़ी बात इस फसल में एक बार की लागत में 30 साल तक किसानों को लाखों का मुनाफा हर सीजन में मिलता रहता है.

किसान गया प्रसाद मौर्य ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट स्वाद में मीठा और ताजगी भरा होता है. आम तौर पर ये वियतनाम, श्रीलंका और चीन की खेती है, जो देश में सबसे पहले गुजरात के कच्छ में शुरू हुई थी. भारतीय बाजारों में इसकी कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है. ड्रैगन फ्रूट के पौधे जमीन में सीमेंट के खंबों के सहारे खेत में लगाए जाते हैं. इस पौधे को सिंचाई की भी ज्यादा जरूर नहीं पड़ती है. ड्रिप विधि के जरिये इसकी सिंचाई होती है. ऐसे में इसकी खेती किसी भी मौसम में नुकसानदायक नहीं है. उन्होंने बताया कि ठंडक के मौसम में इस फसल में फंगस लगने का थोड़ा डर रहता है, लेकिन वह भी जैविक खाद के छिड़काव के बाद खत्म हो जाता है. इसके साथ उन्होंने बताया कि ड्रैगन फ्रूट उगाने के लिए वह केमिकल, कीटनाशक और फर्टिलाइजर का प्रयोग नहीं करते हैं बल्कि जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नीम और गोमूत्र से बने कीटनाशक का प्रयोग करते हैं. साथ ही ड्रिप के माध्यम से सिंचाई ऑर्गेनिक ड्रैगन फ्रूट उगाते हैं.

 

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