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अभी फ्रिजर में ही रहेगा आशुतोष महाराज

चंडीगढ़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार के मामले मे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की एक पीठ ने बुधवार (05 जुलाई) को निर्देश दिया, कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (डीजेजेएस) के प्रमुख आशुतोष महाराज के शव को संरक्षित करने की अनुमति दी जाए।डीजेजेएस प्रमुख को 20 जनवरी, 2014 को चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित कर दिया गया था। डीजेजेएस का मुख्यालय जालंधर के निकट नूरमहल में है। यह चंडीगढ़ से करीब 175 किमी दूर है।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, चिकित्सकों का एक दल आशुतोष महाराज के शव की जांच करेगा। इसके लिए डीजेजेएस को 50 लाख रुपए जमा करने होंगे।

आपको बता दें कि 1 दिसंबर 2014 को जस्टिस एमएमएस बेदी की सिंगल बेंच ने डीजेजेएस प्रमुख के शरीर का अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि आशुतोष महाराज क्लिनिकली डेड को चुके हैं।

जिस वजह से उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाना चाहिए। इस आदेश के खिलाफ डीजेजेएस ने डबल बेंच में चुनौती दी थी और कहा था कि आशुतोष महाराज इस समय समाधि में लीन हैं और एक दिन वो इससे बाहर आएंगे। जिस वजह से उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता।

इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही कोर्ट ने आशुतोष महाराज के तथाकथित बेटे झा की डीएनए की एप्लिकेशन भी खारिज कर दी है। आपको ज्ञात हो कि दिलीप कुमार झा नाम के एक शख्स ने खुद को आशुतोष महाराज का पुत्र बताया था और डीएनए टेस्ट की मांग की थी। कोर्ट ने झा को निर्देश दिया है कि अगर आप डीएनए टेस्ट कराना चाहते हैं तो इसके लिए सिविल सूट दाखिल करना होगा।

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