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उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में वापसी करने में कामयाब रही बसपा, 2017 में नहीं जीत पाई थी एक भी सीट

उत्तराखंड में गुरुवार 10 मार्च को विधानसभा चुनाव के नतीजे आये, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने बाज़ी मारी है। वहीं बहुजन समाज पार्टी ( बसपा } राज्य की दो सीट जीतने में कामयाब हुई है। हरिद्वार की मंगलौर और लक्सर सीटों पर बसपा प्रत्याशियों की जीत के साथ ही बसपा विधानसभा में वापसी करने में कामयाब रही है। दरअसल राज्य गठन के बाद के पहले तीन चुनावों में बसपा राज्य में एक बड़ी ताकत के रूप में रही है।

लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों में बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था। इस बार बसपा ने अपना प्रदर्शन सुधारा है। हालांकि पार्टी चार से पांच सीटों पर जीत के दावे कर रही थी। लेकिन मंगलौर से पार्टी के प्रत्याशी सरबत करीब अंसारी और लक्सर से मोहम्मद शहजाद को ही कामयाबी मिल पाई है।

बसपा ने राज्य में 2002 में सात, 2007 में आठ और 2012 में तीन सीटें जीती थीं। हालांकि 2017 में पार्टी राज्य में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। पार्टी प्रत्याशियों की जीत के बाद बसपा में खुशी का माहौल है। वजह भी साफ है क्योंकि प्रत्याशियों ने भाजपा-कांग्रेस के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर देकर हराया दिया है।

प्रदेश अध्यक्ष नहीं जीत पाए

बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी शीशपाल ज्वालापुर सीट से चुनाव लड़ रहे थे लेकिन वे भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। उन्हें तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। जबिक चुनाव जीतने के लिए चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर बसपा में आए भगवानपुर से प्रत्याशी सुबोध राकेश और सितारगंज के प्रतयाशी पूर्व विधायक नारायण पाल जीत दर्ज नहीं कर पाए।

2012 में रही किंग मेकर

2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा 3 विधायकों पर सिमट गई थी। हालांकि बसपा ने किंग मेकर की भूमिका निभाई और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हुई। भगवानपुर से विधायक सुरेंद्र राकेश बसपा कोटे के कैबिनेट मंत्री भी बने। हालांकि उसके बाद हुए चुनावों में बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई और पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया।

बसपा का मत प्रतिशत और सीटें
2002 – 7
2007- 8
2012- 3
2017 – 0
2022- 2

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