अध्यात्म

कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया जाता है पवित्र नदियों में स्नान और दीपदान, जानिए क्या है विधि और मुहूर्त

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान और दीपदान किया जाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने और फिर दीपदान करने का विशेष महत्व बताया गया है। पूरे भारत में इस दिन को एक पर्व की तरह मनाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा मके दिन गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्यलाभ की प्राप्ति होती है। सात्त्विकता और पुण्यलाभ की प्राप्ति हेतु इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान, पूजा-अर्चना और दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का विनाश होता है। विशेष रूप से कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों के साथ-साथ तीर्थों में भी स्नान करने से व्यक्ति कई पापों से मुक्त हो जाता है।

जानिए गंगा स्नान का महत्व

शास्त्रों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व बताया गया है। आपको बता दें कि इस दिन न केवल गंगा बल्कि अन्य पवित्र नदियों के साथ-साथ तीर्थों में भी स्नान करने की प्राचीन परम्परा है। यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरुक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से शुभाशुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा स्नान के बाद दान करना बेहद शुभ माना जाता है।

दान करने का विशेष महत्व

इस दिन दान करने का विशेष महत्व है। जिसमें संतरा, सेब, शरीफा, उड़द दाल, चावल और उजली चीजों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि आप इस दिन गंगा स्नान के लिए नहीं जा पा रहे हैं, तो घर में सुबह नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर करना भी शुभ होता है। ये उतना ही फलदायी है जितना गंगा में स्नान करना।

जाने कब है गंगा स्नान मुहूर्त

12 नवंबर को मंगलवार के दिन पूर्णिमा रात्रि 7.13 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 :12 बजे से 11 :55 बजे तक है। गुली काल मुहूर्त दोपहर 11 :33 बजे से 12 :55 बजे तक है। 12 नवंबर को मंगलवार के दिन पुरे दिन गंगा स्नान और विष्णु पूजन किया जा सकेगा।

 

Tags
Show More

Related Articles

Back to top button
Close
Close