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आधे दिन चली बैठक के बाद सोनिया गांधी बनाई गईं कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष

2019 के आम चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी शिक्सत से एक बात तो हर कांग्रेसी के दिल-ओ-दिमाग में घर कर गई थी कि अब अगर उन्हें आगे आने वालें चुनावों में अपनी पार्टी को मजबूती देनी है तो कहीं ना कहीं अपनी कार्यशैली में बदलाव तो करना ही पड़ेगा।

सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच ये चर्चा ज़ोरों पर थी की पार्टी को आने वाले समय में बेहतर बनाने के लिए पार्टी के नेतृत्व में भी बदलाव करना पड़ेगा। 2019 के लोकसभा चुनावों तक की बात की जाए तो पार्टी ने राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। लेकिन जब कांग्रेस को एक के बाद एक कई बार हार का मुँह देखना पड़ा तो सियासी गलियारों में उनकी राजनैतिक सूझ-बूझ पर भी उँगलियां उठने लग गई । जनता के बदलते हुए मिज़ाज और राजनिति के बदलते हुए रुख को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने एक बड़ा फैसला लिया और अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने का मन बना लिया ।

लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा से मूंकीं खाने के बाद काग्रेंस का मनोबल धरातल पर था। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने हार की पूरी ज़िम्मेदारी अपने सिर ली और मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया । हालांकि, नाताओं ने उनसे इस्तीफा वापस लेने की मांग की पर राहुल गांधी अपने फैसले पर टिके रहे।

इसके बाद शनिवार को कांग्रेस की कार्य समिति ने पार्टी की बागडोर को सोनिया गांधी को सौंपने का फैसला लिया जिसे सोनिया ने मंजूरी भी दे दी। दरअसल, बतौर अध्यक्ष सोनिया गांधी वर्ष 1998 से 2017 तक पार्टी की कमान संभाल चुकी हैं। आपको बता दें कि कांग्रेस कार्यसमिति में अध्यक्ष के पद के लिए पहले तो राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी तीनों ने ही मना कर दिया था। इसके बाद सब ने उन्हें सुझाव दिया कि आप तीनों ही अब कोई नाम तय कर लें , लेकिन जब बात इस पर भी नहीं बन सकी तो कमेटी ने सोनिया को ही इस पद पर बैठाने का निर्णय कर लिया और सोनिया गांधी ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी।

इस फैसले को लेने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की दो बार बैठक हुई। इस दो बार हुई बैठक में तीन प्रस्ताव पारित किए गए । पहले प्रस्ताव में राहुल के पार्टी में किए गए अब तक के योगदान की सराहना की गई तो वहीं दुसरे में सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किए जाने और तीसरे प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर की स्थिति का उल्लेख किया गया है। आपके बता दें कि पहले प्रस्ताव में बतौर अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी के योगदान की तारीफ करते हुए लिखा गया है कि राहुल गांधी ने बेबाकी से देश के मुद्दों को उठाया, पार्टी को नई ऊर्जा दी और कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया।

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